प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 09 फरवरी, 2019

- छत्तीसगढ़ विधान सभा में नवनिर्वाचित मा. सदस्यों के लिए दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम प्रारंभ

 छत्तीसगढ़ राज्य की पंचम विधान सभा के लिए निर्वाचित मान. सदस्यों के लिए विधान सभा परिसर स्थित समिति कक्ष में आज दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मान. श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति, अध्यक्ष, मध्य-प्रदेश विधान सभा के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधान सभा अध्यक्ष मान. डॉ. चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष मान. श्री धरमलाल कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री मान. श्री रविन्द्र चैबे, राजस्व मंत्री मान. श्री जयसिंह अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, श्री राजगोपाल पी.व्ही, संस्थापक एकता परिषद, समस्त मान. विधायकगण, मध्य-प्रदेश विधान सभा के प्रमुख सचिव श्री ए.पी.सिंह तथा छत्तीसगढ़ विधान सभा के सचिव श्री चन्द्र शेखर गंगराडे़ उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष मा. श्री चरणदास महंत ने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण एवं ज्ञानार्जन के लिए आयु एवं वरिष्ठता की सीमा नहीं होती हैं। योग्य एवं अनुभवी जनों का मार्गदर्शन अनुकरणीय होता हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय सदन की गरिमा सभा के माननीय सदस्यों के कार्य विचार और व्यवहार पर निर्भर करती हैं इसलिए माननीय सदस्यों का शिष्ट तथा संसदीय आचरण ही सदन की गरिमा को बनाये रखने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने मा. सदस्यों से अनुरोध किया कि जिस भावना के साथ उनके निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं ने उन पर विश्वास व्यक्त किया है। उनके विश्वास की रक्षा करना और संसदीय परंपराओं, प्रक्रियाओं का परिपालन करते हुए उनकी अपेक्षाओं को पूर्ण करना मा. सदस्यों का प्रथम दायित्व होना चाहिए।

उद्घाटन अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मान. श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने "प्रश्न, प्रश्नकाल, प्रश्न से उद्भुत विषय पर आधे घंटे की चर्चा’’ पर मा. सदस्यो को संबोधित किया। इस अवसर पर अपने उदबोधन मे मा. श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति, अध्यक्ष म.प्र. विधानसभा ने कहा कि-वे 1985 में प्रथम बार मध्य-प्रदेश विधान सभा मे निर्वाचित होकर आए उस समय मध्य-प्रदेश विधान सभा में मान. श्री अर्जुन सिंह, मान. श्री कैलाश जोशी, मान. श्री विक्रम वर्मा, मान. श्री बाबूलाल गौर जैसे दिग्गज नेता थे जिनके अनुभवों से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। उन्होंने कहा कि सदन में हमारा आचरण एवं व्यवहार मीडिया के माध्यम से हमारे क्षेत्र की जनता के बीच जाता है। उन्होंने इस बात का पर चिंता व्यक्त की कि-आज सदन में गंभीरता और शिष्टता धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदन में हमारी भाषा में संयम होना चाहिए, जिससे कि वह किसी व्यक्ति विशेष की भावनाएं आहत न हो।

मध्य-प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने ’’प्रश्न, प्रश्नकाल, प्रश्न से उद्भुत विषय पर आधे घंटे की चर्चा’’ विषय पर मान. सदस्यों को सारगर्भित एवं महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि-प्रश्न का प्रारूपण एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधा है और इसे समझने के लिए हमें पूरे समय विधान सभा की कार्यवाही में भाग लेना चाहिए।

इस अवसर पर मान. नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि-प्रबोधन कार्यक्रम के माध्यम से मान. सदस्यों के कार्य, व्यवहार, दक्षता एवं प्रखरता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि-सभी मान. सदस्यों को पक्ष-विपक्ष की भावना से ऊपर उठकर प्रदेश एवं जनता की खुशहाली के सतत् प्रयास करते हुए जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

इसके पूर्व अपने स्वागत उद्बोधन में विधान सभा सचिव श्री चन्द्रशेखर गंगराड़े ने कहा कि-नवनिर्वाचित मा. सदस्यो को संसदीय विषयों की प्राथमिक जानकारी और संसदीय शब्दावली से परिचय कराना ही इस प्रबोधन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हैं जिससे कि सभी मा.सदस्यों की सभा की कार्यवाही में संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं के अनुरूप सहभागिता सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मा. श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति, अध्यक्ष म.प्र.विधान सभा का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

कार्यक्रम के अंत में संसदीय कार्यमंत्री श्री रविन्द्र चैबे द्वारा उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।